Echoes Of Dharma
Dive into a captivating tale where a modern woman boldly reinterprets the epic Mahabharata, turning the narrative on its head in this mesmerizing work of historical fiction. As she embarks on a thrilling journey through time, she challenges conventions and explores the depth of human emotions and dilemmas. Prepare to be enchanted as you witness her adventure unfold, defying the boundaries of time and immersing yourself in a rich tapestry of culture, conflict, and revelation!मैं ही त्रेता का राम हूँ |कृष्ण मुझे सब कहते है, मैं द्वापर का घनश्याम हूँ ||रुप कभी नारी का धरकर मैं ही केश बदलता हूँ |धर्म बचाने की खातिर, मैं अनगिन वेष बदलता हूँ |विष्णु जी का दशम रुप मैं परशुराम मतवाला हूँ ||नाग कालिया के फन पे मैं मर्दन करने वाला हूँ |बाँकासुर और महिषासुर को मैंने जिंदा गाड़ दिया ||नरसिंह बन कर धर्म की खातिर हिरण्यकश्यप फाड़ दिया |रथ नहीं तनिक भी चलता है, बस मैं ही आगे बढता हूँ |अर्जुन! गाण्डिव हाथ में तेरे है, पर रणभूमि में मैं लड़ता हूँ ||"When duty is neglected, calamity follows like a cartwheel." "The life of a fool is empty of faith and full of fears."Arjun- राजधर्म एक नौका के समान है, यह नौकाधर्म रूपी समुद…